November 2, 2026

प्राथमिक विद्यालय पुराना सोनौली में बच्चों की किलकारी से वातावरण से बना शैक्षणिक

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विधालय में 80 प्रतिशत नितमित आते है 82% छात्रों का नाम ई- शिक्षा से जोड़ा गया है : प्रधानाध्यापक

प्रवीण कुमार, कटिहार

ग्रामीण क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय पुराना सोनौली में भी सुबह-सुबह बच्चों की किलकारी से आसपास का वातावरण भी शैक्षणिक बनता जा रहा है। स्कूली ड्रेस में छोटे-छोटे बच्चे एवं बच्चियों सुबह अपने अपने घरों में उठकर 6:30 बजे से पूर्व विद्यालय पहुंच जाते हैं। यह परिवर्तन बहुत ही खास माना जाता है। इस तरह का दृश्य जिले के कदवा प्रखंड अंतर्गत भोगाँव पंचायत स्थित प्राथमिक विद्यालय पुराना सोनौली में देखने को मिला। सुबह 6:30 बजे से पहले छोटे-छोटे बच्चे एवं बच्चियों स्कूल पहुंच गये। बच्चे एवं बच्ची की पीठ पर कोपी,किताब,कलम से भरा बैंग तथा गले में लाल रंग की पानी का बोतल टंगा हुआ सड़क पर चलते हुए स्कूल आने का नियमित रूटीन बन गया है। यह सब व्यवस्था को बहाल करने में प्राथमिक विद्यालय पुराना सोनौली के प्रधानाध्यापक विमल कुमार भगत का विशेष रूप से योगदान है। प्रधानाध्यापक विमल कुमार भगत प्रत्येक दिन सुबह 6:00 बजे विद्यालय पहुंच जाते हैं। विद्यालय में नंदिनी वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड नरियल टंगी, मुजफ्फरपुर के द्वारा एक पुरुष हाउस कीपर की प्रतिनियुक्ति की है। प्रधानाध्यापक हाउस कीपर के द्वारा विद्यालय परिसर एवं शौचालय की नियमित रूप से सफाई करवाते हैं।सभी शिक्षक-शिक्षिका 6:30 सुबह से पहले विद्यालय पहुंच जाते हैं। प्रधानाध्यापक विमल कुमार भगत ने बताया कि सुबह में चेतना सत्र चलाया जाता है।चेतना सत्र में बच्चों को प्रार्थना, बिहार गीत,संविधान का प्रस्तावना, समाचार वाचक,प्रेरक प्रसंग, योगा,राष्ट्रीय गान सिखाया जाता है। प्रथम पाली में कक्षा का संचालन होता है। बीच बच्चों सभी छात्र-छात्राओं के बीच मीनू के अनुसार भोजन परोसा जाता है। दूसरी पाली में कक्षा का संचालन किया जाता है।उसके बाद कमजोर बच्चों को विशेष कक्षा का संचालन किया जाता है। तब सभी शिक्षक शिक्षिका विद्यालय से अपने घरों के लिए प्रस्थान करते हैं। प्रधानाध्यापक विमल कुमार भगत ने बताया कि विद्यालय में चार शिक्षिका है।जिसमें पूर्णिमा कुमारी, कृष्णा बशाक, शबनम कुमारी, शिक्षा सेवक किरण कुमारी वर्ग संचालन में काफी सहयोग करती हैं। सभी शिक्षिका समय पर विद्यालय पहुंचकर अपनी-अपनी जिम्मेवारी का बखूबी निर्वाह कर रहे हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि विद्यालय में वर्ग 1 से 5 तक की पठन-पाठन की जाती है। विधालय में 169 बच्चे का नामांकन विद्यालय में है। जिसमें 80% बच्चे नियमित रूप से विद्यालय पहुंचते हैं।विधालय के प्रधानाध्यापक विमल कुमार भगत तथा एक शिक्षक पूर्णिमा कुमारी का शिक्षिका ई-शिक्षा उपस्थिति दर्ज किया जाता है।विद्यालय एक एकड़ जमीन पर 6 कमरे का दो मंजिला मकान है। विद्यालय के छात्राओं को मध्यान भोजन मीनू के अनुसार प्रतिदिन दिया जाता है। मध्यान भोजन तीन रसोईया के द्वारा गैस चूल्हे पर भोजन पका कर परोसा जाता है। विद्यालय में बच्चों की नियमित उपस्थिति के लिए प्रतिदिन प्रधानाध्यापक, शिक्षक के साथ गांव-गांव घूम कर बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए अभिभावक को प्रेरित करते हैं। सप्ताह में एक दिन अभिभावक और शिक्षक के साथ संगोष्ठी का आयोजन किया जाता है। संगोष्ठी में बच्चों को विद्यालय भेजना तथा पठन-पाठन स्वच्छता पर विशेष रूप से चर्चा की जाती है।जिसके कारण छात्रों की उपस्थिति 80% बनी रहती है।प्रधानाध्यापक श्री भगत ने बताया कि विद्यालय में बिजली की व्यवस्था की गई है।कार्यालय सहित चार कमरे में बिजली पंखा लगाया गया है, ताकि गर्मी के मौसम में बच्चों को गर्मी से राहत मिल सके। प्रधानाध्यापक अपने कार्य कुशलता के कारण बच्चों छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों से काफी घुल मिल गए हैं और विद्यालय का सर्वांगीण विकास करने के लिए कृत संकल्पित हैं। प्रधानाध्यापक श्री भगत ने बताया कि विधालय की साफ सफाई नियमित रूप से कराई जाती है। बच्चों को पेयजल के लिए एक मोटर पम्प विद्यालय परिसर में लगाया गया है।विधालय में दो शौचालय बनाया गया है। विद्यालय में चारदीवारी का निर्माण किया गया है।विधालय के कमरा को बाल दृश्य कमरा बनाया गया। प्रधानाध्यापक विमल कुमार भगत ने बताया कि अपने कार्यकाल में विद्यालय में प्रमुख गेट का निर्माण किया रसोई घर शौचालय में नल युक्त पानी की व्यवस्था की शौचालय का निर्माण किया खेलकूद की सामग्री खरीदारी की स्पीकर सेट लिया गया कार्यालय में टेबल कुर्सी बेंच की व्यवस्था की गई विद्यालय का रंग रोगन करते हुए जीर्णोद्धार किया गया। बिजली वायरिंग किया गया। वाई-फाई का कनेक्शन 2 वर्ष पूर्व लगाया गया है, लेकिन दो-चार दिन काम करने के पश्चात वाई-फाई काम करना बंद कर दिया है। जिसके कारण ई- शिक्षा कार्य शिक्षिका नीजि मोबाइल के माध्यम से की विद्यालय के 140 छात्राओं का नाम ई-शिक्षा पर डाला गया।इस प्रकार 82% छात्रों का नाम ई- शिक्षा से जोड़ा गया है। प्रधानाध्यापक विमल कुमार भगत ने बताया कि विद्यालय में क्लास रूम की रिपेयरिंग हो जाता तो छात्र-छात्राओं को पठन-पाठन करने में आसानी होती। विद्यालय में चापाकल लग जाता तो पेयजल के लिए सुविधा हो जाती। विद्यालय में कम से कम एक वर्ग कक्षा का निर्माण हो जाता तो पठन-पाठन करने में आसानी होती। विद्यालय में शुद्ध पेयजल के लिए आर ओ लगा दी जाता तो अच्छा होता। वाई फाई को चालू कर दिया जाता। टेलीविजन लगा दिया जाता, लैपटॉप दिया जाता, खेलकूद की सामग्री दी जाती, प्रत्येक कमरे में दो- दो पंखे की व्यवस्था हो जाने से छात्र-छात्राओं को और भी काफी सुविधा का लाभ मिल सकता है। प्रधानाध्यापक में उपरोक्त सभी मांगे अगर समय रहते हुए पूरा कर दिया जाता है, तो विद्यालय व्यवस्था और बेहतर हो जाता।विधालय संचालन की व्यस्था से छात्र तथा अभिभावकों में हर्ष व्याप्त है।

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